झांसी।जिले में संस्था “प्रयास: सभी के लिए” के तत्वावधान में आयोजित पंचदिवसीय युवा महोत्सव–2026 का भव्य शुभारम्भ स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर किया गया।

यह शुभारम्भ मुख्य अतिथि राम किशोर साहू जी (क्षेत्रीय महामंत्री, भाजपा) एवं विशिष्ट अतिथि मनोज कुमार मिश्रा (प्रधानाचार्य, एस.पी.आई. इंटर कॉलेज) के कर-कमलों से, स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्ष रामबाबू शर्मा ने की तथा आयोजन संस्थापक अध्यक्ष मनमोहन गेड़ा के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में संस्था “प्रयास: सभी के लिए” की सराहना करते हुए कहा कि ‘भूले-बिसरे खेल–युवा महोत्सव 2026’ के माध्यम से पारंपरिक एवं लगभग विलुप्त हो चुके खेलों को पुनः जीवंत कर आज की युवा पीढ़ी के समक्ष प्रस्तुत करना एक अनुकरणीय पहल है। यह प्रयास न केवल खेल संस्कृति का संरक्षण करता है, बल्कि युवाओं में शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक सजगता और सामाजिक समरसता को भी सुदृढ़ करता है।
संस्थापक अध्यक्ष मनमोहन गेड़ा ने पारंपरिक खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये खेल हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। ये खेल समानता, एकाग्रता, रणनीति निर्माण तथा हार-जीत को सहजता से स्वीकार करने की खेल भावना (स्पोर्ट्समैनशिप) सिखाते हैं। आज के डिजिटल युग में, जब बच्चे मोबाइल और वीडियो गेम्स में अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं, ऐसे खेल उनके शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

विशिष्ट अतिथि मनोज कुमार मिश्रा ने कहा कि रूमाल झपट्टा और गिल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक खेल शारीरिक विकास, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और टीम भावना को सशक्त करते हैं। ये सरल, मनोरंजक, सस्ते और सुलभ खेल हैं, जिन्हें बिना किसी महंगे उपकरण के कहीं भी खेला जा सकता है।
मुख्य कार्यक्रम संयोजक महेन्द्र दीवान ने युवा महोत्सव की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि गैजेट्स के इस युग में ऐसे खेल बच्चों को सक्रिय रखते हैं, स्क्रीन-टाइम से दूर करते हैं और प्रकृति के निकट लाते हैं।
अध्यक्ष रामबाबू शर्मा ने कहा कि संस्था भारतीय संस्कार, विरासत और ग्रामीण संस्कृति की पहचान को संजोने के लिए प्रतिबद्ध है; पारंपरिक खेल आज भी ग्रामीण जीवन में जीवंत हैं और उन्हें आधुनिक परिवेश में युवाओं के सामने लाना एक सार्थक एवं सुखद प्रयास है।

‘भूले-बिसरे खेल–2026’ के प्रथम दिन रूमाल झपट्टा एवं गिल्ली-डंडा प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें लगभग 60 बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सुहाने मौसम के बीच छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक खेलों का भरपूर आनंद लिया। संस्था के पदाधिकारियों ने भी खेलों में भाग लेकर सहभागिता का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संयोजन नवीन श्रीवास्तव एवं राकेश मेहरोत्रा ने किया।प्रतियोगिताएँ सरस्वती पाठशाला इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज परिसर में सम्पन्न हुईं। रेफरी/जज के रूप में संजीव त्रिपाठी एवं अजय रजक उपस्थित रहे।
परिणाम:
रूमाल झपट्टा में चार टीमों ने भाग लिया।
विजेता: रानी लक्ष्मी बाई टीम — 26 अंक
(पलक सेन, मोहिनी राजपूत, प्रिंशिका अहिरवार, काजल राजपूत, कशिश राजपूत, काजल प्रजापति)
उपविजेता: वीरांगना झलकारी बाई टीम — 18 अंक
(सिमरन अहिरवार, प्रिंसी राजपूत, मोहिनी कुशवाहा, भारती अहिरवार, कृष्णा वंशकार, स्नेहा रायकवार)
गिल्ली-डंडा (बालक वर्ग): चार टीमों के मध्य प्रतियोगिता सम्पन्न हुई।
विजेता टीम: जतिन रायकवार, अनिकेत अहिरवार, अभिषेक अहिरवार, विमल लाम्बा, सिद्धांत यादव, राज यादव
सभी विजयी प्रतिभागियों को 14 जनवरी को दीनदयाल सभागार में आयोजित सांस्कृतिक समापन संध्या में सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन संरक्षक रामकुमार लोहिया ने किया तथा
अंत में कार्यक्रम समन्वयक पवन नैयर ने सभी का आभार व्यक्त किया ।
वैभव सिंह
बुंदेलखंड कनेक्शन
