झांसी। दशकों तक बदहाली का शिकार रहे बुंदेलखंड के विकास के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की नयी योजनाओं से विकास की सुगबुगाहट होने लगी है लेकिन दूसरी ओर एक बड़ा वर्ग जो बुंदेलखंड राज्य निर्माण के समर्थन में लगातार आंदोलनरत है , अलग राज्य से इतर बुंदेलखंड के लिए शुरू की गयी किसी भी योजना से संतुष्ट नहीं है।

सरकार ने बुंदेलखंड के चहुंमुखी विकास और यहां की समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न कल्याणकारी और विकासपरक याेजनाओं की शुरूआत की । इस क्षेत्र की पानी,बेरोजगारी,पलायन जैसी मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए सबसे पहले दिसम्बर 2017 में प्रदेश की नयी औद्योगिक नीति में बुंदेलखंड के लिए विशेष प्रावधान किये गये। इस नीति के तहत पानी की कमी के कारण खेती की बड़ी संभावनाओं की दृष्टि से पिछडे इस क्षेत्र के औद्योगिक विकास का खाका सरकार ने खींचा। इस क्षेत्र में डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेस वे और उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष छूट और कागजी कार्रवाई में कमी लाकर प्रक्रिया सरलीकरण के काम किये गये ।
एक नये निवेश मित्र पोर्टल की शुरूआत की गयी है जिसमें लगभग 70 सेवाओं और 20 विभागों को ऑनलाइन कर दिया गया है। कोई उद्यमी के उद्योग विशेष की स्थापना का फार्म भरते ही उसके लिए आवश्यक चीजों की जानकारी स्वत: मुहैया करा दी जाती है । इस तरह उद्योग की स्थापना से पहले अनापत्तिप्रमाण पत्र प्राप्त करने तथा अन्य स्वीकृतियों के लिए अलग अलग विभागों में चक्कर लगाने जैसी चीजें पूरी तरह से खत्म कर दी गयी है। प्रक्रिया सरलीकरण की इस कवायद से उद्योगों की स्थापना का काम आसान हुआ है और इससे बुंदेलखंड में बड़ी मात्रा में रोजगार सृजन और पलायन रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।
आरएसपीएल में घड़ी डिटरजेंट वालों ने 60 करोड़ का निवेश किया है और इसमें लगभग 800 लोगों को रोजगार दिया गया है। बबीना में इंडो गल्फ लगभग 150 करोड का निवेश कर रही है, जहां 800 से 1000 लोगों काे रोजगार दिया जायेगा। पतंजलि 1200 करोड करने जा रहा है। वैद्यनाथ ने 148 करोड़ के निवेश पर काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा छोटे उद्यमी भी निवेश के लिए कार्रवाई शुरू कर चुके हैंं। इस तरह बुंदेलखंड में बडे निवेश और उद्यमो की स्थापना से बडे पैमाने पर रोजगार सृजन कर पलायन रोकने की सरकार ने रणनीति बनायी है।
इतना ही नही “ एक जिला, एक उत्पाद” योजना के तहत प्रदेश के 75 जिलों से एक एक उत्पाद को चुनकर उस क्षेत्र से जुड़े छोटे कामगारों को प्रशिक्षण, धन और अन्य सुविधाएं मुहैया कराकर उनके उत्पाद की बिक्री तक की व्यवस्था की गयी है। इस योजना का भी उद्देश्य बड़े पैमाने पर लोगों को स्वरोजगार मुहैया कराना और इसके जरिए उनके आर्थिक स्तर में सुधार लाना है। इसके अलावा जनपद के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के स्थानीय दस्तकारों एवं पारंपरिक कारीगरों के विकास के लिए शासन ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना संचालित करने का निर्णय लिया , इस योजना के तहत पारंपरिक कारीगर बढ़ई, दर्जी, टोकरी बुनकर, नाई, सुनार, लोहार, कुम्हार, हलवाई, मोची, राजमिस्त्री एवं हस्तशिल्पियों में आजीविका के संसाधनों का सुदृढ़ीकरण कर उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाएगा।
इन सभी योजनाओं से सरकार की मंशा समाज के सभी तबकों को न केवल रोजगार मुहैया कराने बल्कि पुश्तैनी कार्यों में लगे कामगारों को भी आर्थिक रूप से सुदृढ बनाने की है। औद्योगिक विकास के लिए सरकार बुंदेलखंड में यूं तो काफी प्रयास शुरू कर चुकी है लेकिन यह सभी योजनाएं अभी काफी प्रारंभिक स्तर पर हैं । डिफेंस कॉरिडोर और एक्सप्रेस वे या बडे उद्योगों की स्थापना ऐसे विषय है कि इनमें बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलने में समय लगेगा हालांकि इन पर काम शुरू होते ही अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलना भी शुरू हो जायेगा लेकिन सही रूप से इसके लाभ कितने लोगों को मिल पाये हैं इसका पता इन योजनाओं के पूरा होने के बाद ही चल पायेगा ।
इस काम में अभी समय लगेगा लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि सरकार ने प्रयास शुरू कर दिये हैं जिसके परिणाम चार से पांच साल में पूरी तरह से मिल पायेंगे। बुंदेलखंड मे उद्योगों के विकास को बढावा देने के साथ साथ किसानों के लिए भी स्थितियां ठीक करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और पर्यावरण ,पानी की कमी और लंबे ग्रीष्मकाल के अनुसार किसानों को खेती से लाभ पहुंचाने के लिए कई प्रकार के प्रयास सरकारी स्तर पर किये जा रहे हैं। शासन के स्तर पर इस क्षेत्र में जैविक खेती और कम पानी वाली फसलाें को लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी तरह से उपलब्ध पानी की कम से कम बरबादी को ध्यान में रखते हुए किसानों को स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई के लाभों के बारे में न केवल बताया जा रहा है बल्कि इसके इस्तेमाल के लिए जरूरी प्रशिक्षण और आवश्यक साजोसामान उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
